Me Shayeri Q Likhti Hoon Ye Mujhe Nahi Pata,Magar Shayeri K Maadyam Se Me Aap Sabhi Ko Kuch Mehsus Kerana Chahti Hoon,Jaise Prem - Pira - Pehchaan Or Parichay,Jab Tanhai Me Apne Under Ki Aatmaa Ko Mehsus Karti Hoon,Tab Anubhurtiyaan Ek Dard Sa Man Hi Man Me Sisakta Rehta Hai,Jise Maine Apne Dill Se Anubhurti Kar Shayeri K Maadhyam Se Kavita K Zariye Logon Tak Pahunchaane Ki Koshish Ki Hai,Shayeri Likhna Koi Mazaak Nahi,Dill Se Shayeri Likhte Waqt Aansu Aa Jaate Hai...
~ ~ Sadah Bahar ~ ~

Vote This Page

Saturday, 26 May 2012

टुटा हुआ दिल

मुझ पे इतना रहम न करना ,

के उनपे रहम न आए ,  

मुझ पे इतना रहम ज़रूर करना की ,

हम उनके बिना जी न पाए ,

ज़िन्दगी में न भूल पाने वाली चीज़  ,

अब तक उनका दिया हुआ प्यार था ,  

लेकिन अब उनका दिया हुआ गम और ,

टुटा हुआ दिल है मेरे पास ,

जिसे में अब अपने हांथों से ,

सीलकर जोड़ना चाहती हूँ  ।


~ ~ सदा बहार ~ ~ 

5 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  2. गमगीन पर सुन्दर रचना..

    ReplyDelete
  3. सुन्दर रचना और साथ में सुन्दर गीत का संगम बहुत पसंद आया ये अंदाज

    ReplyDelete
  4. thanxx to all aap ka iss tarah se aana or mere rachna par like , comments karna hume achha laga.....

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...