Me Shayeri Q Likhti Hoon Ye Mujhe Nahi Pata,Magar Shayeri K Maadyam Se Me Aap Sabhi Ko Kuch Mehsus Kerana Chahti Hoon,Jaise Prem - Pira - Pehchaan Or Parichay,Jab Tanhai Me Apne Under Ki Aatmaa Ko Mehsus Karti Hoon,Tab Anubhurtiyaan Ek Dard Sa Man Hi Man Me Sisakta Rehta Hai,Jise Maine Apne Dill Se Anubhurti Kar Shayeri K Maadhyam Se Kavita K Zariye Logon Tak Pahunchaane Ki Koshish Ki Hai,Shayeri Likhna Koi Mazaak Nahi,Dill Se Shayeri Likhte Waqt Aansu Aa Jaate Hai...
~ ~ Sadah Bahar ~ ~

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Thursday, 31 May 2012

दरार - ए - इश्क

इश्क करना आसान नहीं ,


हमने भी किया था इश्क ,


आँखों ही आँखों में ,


सपनें दिखाया करते थे वो मुझको ,


न सपनें पूरी हुई न इश्क ,


फिर भी चाहत की तमन्ना हज़ारों थे ,


इश्क ही इश्क में तस्वीर बनकर ,


रहे गए हम उनके दिल में 

,
हमारी ज़िन्दगी बर्बादी की तरफ चलते गयी 

,
जिस सूरत को आँखों ही आँखों में बसाया था हमने 

,
आज वो सूरत हमे देखकर भी अनदेखा करने लगा ,


मेरी आवाज़ भी आज उन्हें कड़कस लगने लगा ,


न जाने क्या कसूर था मेरा ,


जो आज एक चाहत की हज़ारों दरारें देकर ,


साथ ही दर्द और तनाव देकर छोड़ दिया उसने ।



~ ~ सदा बहार ~ ~

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